एक बार फिर, महिलाओं की शिक्षा लम्बा investment है|


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अब हम बिना झिझक गाँव से शहर अपना माल बेंचने जाते हैं. हमारा समूह खेती, बकरी पालन और कैटरिंग के काम करते हैं”..अधेड़ उम्र की सावित्री ने बड़े ही आत्म-विश्वास से यह बात 200 लोगों के सामने कही. वाराणसी जिले के चोलापुर ब्लाक में पिछले दो वर्षों से चलाये जा रहे इस कार्यक्रम का पिछले महीने अवलोकन कर रहा था मैं. मैंने पूछा: “आप को यह समझ कैसे आई? आप सभी महिलाएं इतने उत्साह से कैसे सक्रिय हो गयीं?”

इस बार 3-4 महिलाएं एक साथ खड़ी होकर बोली की हम सब प्रौढ़ शिक्षा की कक्षा में आपसी समझ और संगठन बनाते हैं. पिछले दो वर्षों से सप्ताह में तीन दिन हम सभी दो घंटे साथ में बैठकर पढ़ाई करते हैं और साथ ही अपने रोजगार की प्लानिंग भी. हमें स्वयं पर विश्वास हो गया है; हम अकेले गाँव से शहर जाते हैं; हमारे रोजगार के लिए नया कौशल सीखते हैं|

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अगले दिन मैं बिहार और झारखण्ड के बॉर्डर पर स्तिथ जपला स्टेशन के पास वाले महुअरि गाँव पहुंचा. यहाँ अधिकांश महिला समूहों में मुसहर, भुइयां दलित और महादलित परिवारों की महिलाएं हर हफ्ते तीन दिन पढ़ना और लिखना सीखती हैं. उनमे इतना उत्साह और अपनी लड़कियों को पढ़ने का अवसर देने का संकल्प दिखा. स्कूल और टीचर के आभाव के बावजूद ये लड़कियां पढाई में जुटी हैं. स्थानीय व्यवस्था से परीक्षा में अच्छे नंबर से पास हो जाने का विश्वास दिखा |

फिर लौटते वक़्त एक CSR के ऑफिसर मिल गए. उन्होंने पूछा की यह बड़ी उम्र की औरतों की पढ़ाई तो sustainable नहीं बन सकती. मेरे पूछने पर उन्होंने स्पष्ट किया की उनका अर्थ सेल्फ-फाइनेंसिंग वाली बात से था. मैंने उनसे पूछा की क्या उनकी अपनी शिक्षा उन्होंने अपने पैसे से की थी, या किसी और के? और आज बीस वर्ष बाद जब उनकी आमदनी तय है तो क्या यह sustainability नहीं हुई?

चालीस वर्ष पूर्व जब मैं पहली बार राजस्थान के ग्रामीण इलाके की महिलायों की प्रौढ़ शिक्षा और साक्षरता के कार्यक्रम देखता था, तब भी लड़कियों और महिलायों में सीखने के प्रति जो उत्साह दीखता था वह मुझे उत्तर प्रदेश और बिहार की इन औरतों और लड़कियों में फिर से दिखा. उनमे अपने जीवन को सुधारने की इच्छा तो है पर अवसर और साधन नहीं. यही योगदान स्वैच्छिक प्रयास तब भी देते थे, और आज भी इनकी उतनी ही आवश्यकता है|

एक दो साल चल कर लम्बे अरसे की sustainability नहीं बन जाती. अब यह बात और कब तक किन-किन को समझाऊंगा मैं? इसमें खर्चा नहीं investment का नजरिया चाहिए. बिज़नस करने वालों को भी investment सिखाना पड़ेगा क्या?

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