Author Archives: Samiksha Jha

नए कल की शुरुआत आज से ही होगी

  “हम अभी क्या है? और आगे क्या हो सकते है, हम अभी क्या सोचते हैं, हम किस तरह की बातों का समर्थन करते हैं, ये सब कुछ हमारी socialization और past experiences पर निर्भर करता है” | ये बात … Continue reading

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आवाज़ ऊठी नहीं तो, जुल्म और बढ़ता जायेगा

“आवाज़ ऊठी नहीं तो, जुल्म और बढ़ता जायेगा”, ये अपने आप में एक ऐसा वाक्य है जो सदियों से हो रहे भेदभाव, हिंसा और गैर बराबरी की गवाही दे रहा है। 4 अप्रैल को ” वीमेन मार्च फ़ॉर चेंज” का … Continue reading

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खुद से पहल

पिछले कुछ वर्षों से असुरक्षा की दिल दहला देने वाली कई घटनाएं सामने आई हैं। इसकी कई वजह हो सकती है, ये भी हो सकता है कि असल में संकुचित मानसिकता के कारण यह घटनाएं बढी हों या तो फिर … Continue reading

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