कदम बढ़ाते चलो का सफ़र

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(कदम बढ़ाते चलो के स्पोर्ट्स ट्रेनर, आकाश थापा, अपने अनुभव के बारे में लिखते हुए बताते है की कैसे यह कार्यक्रम युवाओं को अपनी क्षमताओं का एहसास दिलाता है |)

मार्था फार्रेल फाउंडेशन के द्वारा आयोजित किया गया कदम बढ़ाते चलो 2.0 कार्यक्रम के अंतर्गत “फ्रीडम टू प्ले” कैंप और “जेंडर थ्रू स्पोर्ट्स” वर्कशॉप के बाद मैं, आकाश थापा, सबसे पहले होने वाले “स्पोर्ट्स लीडरशिप कैंप” का हिस्सा बना जो की रायपुर, छत्तीसगढ़ में आयोजित किया गया |

दिनाक 22 और 23 सितम्बर 2018 को फ्रीडम टू प्ले कैंप में 162 प्रतिभागियों ने भाग लिया, जिन में से 56 प्रतिभागियों (35 लडकियों और 21 लडको) को “जेंडर थ्रू स्पोर्ट्स” के वर्कशॉप के लिए चुना गया |

दिनांक 13 और 14 अक्टूबर को सभी चुने गये युवा “जेंडर थ्रू स्पोर्ट्स” वर्कशॉप का हिस्सा बने | यह वर्कशॉप मांडर सरकारी विद्यालय में आयोजित की गयी जो की मांडर ग्राम पंचायत के अंतर्गत आता है और इसी के साथ दोंदेकला व टेकारी गाँव के विद्यालय से भी प्रतिभागी थेI
दिनांक 5 से 7 दिसंबर के बीच “स्पोर्र्स लीडरशिप” कैंप का आयोजन स्थानीय पार्टनर के सहयोग से प्राथमिक सरकारी विद्यालय में किया गया जो टेकारी गाँव में स्थित है |

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51 यूवा प्रतिभ्गियो ने स्पोर्ट्स लीडरशिप कैंप में भाग लिया, जिस में 17 लड़के और 34 लड़कियां थी | तीन दिन इस वर्कशॉप में युवाओं को छोटे-छोटे समूह में विभाजित कर के उनसे विभिन्न सामूहिक गतिविधिया करवाई जाती है | इनका मुख्या उधेश्य इन युवाओं में नेतृत्व कला, प्रभावशाली संचार, फैसिलिटेशन स्किल, प्लानिंग एवं ओर्गानिज़िंग, टीम वर्क इत्यादि सिखाना है, जिनके माध्यम से ये युवा अपने समुदाय में महिला हिंसा को रोक सकें |

इस कार्यशाला का तीसरा दिन बहुत महत्वपूर्ण होता है | इस दिन युवाओं द्वारा नकली अभ्यास सत्र आयोजित किया जाता है | युवाओं के समूह विभिन्न खेल चुनकर अभ्यास के तौर पर करके दिखाते है, जिसमे सभी ग्रुप अपने सीखे हुए स्किल का प्रदर्शन करते हैं |

मैंने सकारात्मक बदलावों के कुछ चरणों को व्यक्तिगत रूप से अनूभव किया | यह मेरे लिए एक अद्भुद अनुभव था | पहले ही दिन से, मैं सभी प्रतिभागियों और उनके बने समूह पर ध्यान दे रहा था | इस दौरान मेरी नज़र एक समूह पर पड़ी और इस जोड़े में एक लड़का और एक लड़की थे | यह जोड़ा भी बाकि प्रतिभागियों कि तरह “फ्रीडम टू प्ले” और “जेंडर थ्रू स्पोर्ट्स” दोनों का हिस्सा रह चूका था और यह उन दोनों का तीसरा कैंप था |

पिछले दो दिन के सत्र में उन दोनों ने जो सीखा था उसका प्रदर्शन उनकी जोड़ी ने बहुत ही अच्छा किया | उनके तालमेल में काफी संतुलन दिखा, खेलकूद कार्य को आयोजित करने के लिए उचित सामान का चुनाव व उसको व्यवस्थित करने का तरीका उम्दा था | दोनों ने मिल कर टीम को बराबर भागो में बांटा जिसमे लड़कों और लड़कियों की संख्या समान थी | दोनों का अपने-अपने टीम को संबोधन करने का तरीका अच्छा था | उनमे एक आत्मविश्वाश दिखाई दिया और सत्र के दौरान दोनों अपनी टीम को प्रोत्साहित करते हुए दिखे |

एक नई चीज़ जो दिखी, वह यह थी कि दोनों ने अपने-अपने गेम में खुद से कुछ नए बदलाव किये जो की सराहनीय कार्य था |

जब यहाँ पहला “फ्रीडम टू प्ले” कैंप किया था, तब इन युवाओं में रुढ़िवादी समाज कि झलक थी | जैसे की, आत्मविश्वास की कमी होना, लड़का-लड़की का एक दुसरे से कम बातचीत करना, एक दुसरे को खुद से कम आंकना, इत्यादि | पर यह देख के बहुत अच्छा लगा कि कैसे कदम बढ़ाते चलो कार्यक्रम एक युवा के आत्मविश्वाश को जगाता है, उसे अपनी नेतृत्व करने की क्षमता का एहसास कराता है, ताकि वह और युवाओं को अपने साथे जोड़े और उन्हें महिला हिंसा जैसे संवेदनशील मुद्दे पर आवाज़ उठाने के लिए प्रेरित करे |

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