#मैंभी हूँ शामिल

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TIME मैगज़ीन ने इस वर्ष की Person of Year #METOO अभियान को घोषित किया| पूरी दुनिया में #मैंभी अभियान एक viral की तरह तब फैला जब Hollywood की कुछ Actresses ने Harvey नाम के एक प्रडूसर के ख़िलाफ़ sexual उत्पीड़न का इल्ज़ाम लगाया| इन महिलाओं ने अपनी चुप्पी तोड़ी और वर्षों पुराने दुखद अनुभवों को सार्वजनिक रूप से कहा| blimg01

#मैंभी अभियान सोशल मीडिया के माध्यम से तब viral हुआ जब अलग अलग देशों और मौहल्लों से महिलाओं ने अपनी चुप्पी तोड़ी और sexual harassment के अपने पुराने अनुभवों को धीरे धीरे कहना शुरू किया| जवान या अधेड़, काली या गोरी, छोटी या बड़ी, ग़रीब या अमीर, देशी या विदेशी, हिंदू या मुसलमान, सिख या ईसाई—- सभी प्रकार की महिलाओं का वर्षों से यही अनुभव होता रहा|

#ऐसाक्यूँ?

क्यों वर्षों से लड़कियाँ और महिलाएँ पुरुषों द्वारा sexual हिंसा का शिकार बनती रहती हैं?

#ऐसाक्यूँ?

#MeToo अभियान के तेज़ी पकड़ने पर तमाम पुरुषों ने यह कहना शुरू कर दिया की इतनी पुरानी बात अब क्यूँ उठाई जा रही है? जब घटना हुई तब क्यूँ नहीं बोला? यह तो पुरानी बातों का बेवजह बवाल खड़ा करना हुआ|

तो ऐसाक्यूँ करती हैं ये महिलाएँ?

और इन साहसी महिलाओं ने क्या जवाब दिया?

उन्होंने अपनी चुप्पी इतने वर्षों बाद इस लिए तोड़ी कि उन्हें दूसरों द्वारा की गयी पहल से बल मिला| उनमे हिम्मत आई की वो अपने पुराने दर्दों को खुल कर बता सकें| उनके बारे में बता सकें जिन्होंने ने उनपर यह sexual violence की| उनका नाम खुल कर कह सकें ताकि ऐसे पुरुषों द्वारा दोबारा sexual हिंसा के प्रयासों को रोका जा सके, और अन्य महिलाओं व लड़कियों को ऐसी हिंसा का शिकार न बनना पड़े|

उन्होंने चुप्पी इस लिए भी तोड़ी ताकि उनके प्रियजनो को भी यह पता लगे की उनके पुराने घाव अभी भी दुखदाई हैं| इन महिलाओं की चुप्पी के पीछे कई बातें छिपी हुईं हैं| पर एक बात कई बार निकलती है कि sexual violence के बाद सगे सम्बंधी, दोस्त और सहयोगी भी चुप रहने की सलाह देते हैं| बात दबाने के लिए मदद देते हैं, बात उठाने के लिए नहीं| और यह मान लेते हैं कि कुछ समय बाद सब ठीक हो जाएगा|

#मैंभी अभियान से खुली चुप्पी यह कह रही है कि समय बीतता गया, ज़ुबान दबी रही, और sexual harassment चलता रहा| उन्ही मर्दों ने इसे चालू रखा, और मर्द भी जुड़ते गए|

#ऐसाक्यूँ की हमारे अपने चाहने वाले भी इस चुप्पी की साज़िश बनाते हैं?

#ऐसाक्यूँ?

चुप्पी क्या टूटी कि सब्र और ख़ामोशी का बाँध ही बह गया| हमारे शहरों, गलियों, गाँवो और सड़कों से आवाज़ बुलंद हुई की #मैंभी इसमें शामिल हूँ| मेरे साथ भी sexual violence हुई, और अब मैं भी बोल पड़ी हूँ|

#MeToo #मैंभी

हमारे Bollywood से भी उठी आवाज़, पर दबी ज़ुबान से ही| हमारे स्कूल और कॉलेज से भी उठ रही हैं, पर खुल कर| हमारे दफ़्तरों और संस्थानो से भी sexual harassment की तमाम कहानियाँ निकल रही हैं|

और यह भी पूछ रहीं हैं की हमारे देश के क़ानूनों का क्या हो रहा है? Sexual harassment रोकने के अधिनियम के तहत सभी दफ़्तरों और कॉलेजों में क़ानून के अनुसार committee क्यों नहीं बनी और चलीं?

#ऐसाक्यूँ की हॉलीवुड के तमाम producers ने मिल कर Anita Hill के नेतृत्व में एक Commission बना दिया, पर बॉलीवुड अभी भी चुप क्यों है?

#ऐसाक्यूँ कि अमेरिका और Europe की बड़ी कम्पनियों के shareholders उनके CEOs के द्वारा किए गए sexual harassment के ख़िलाफ़ आवाज़ उठा कर उन्हें निकाल रहे हैं, और हमारे देश में अभी भी चुप्पी सधी है?

#ऐसाक्यूँ की कनाडा के खेल संगठनों ने हाल ही में Olympics में gymnastics के coach को sexual harassment की शिकायत पर निकाल दिया, और हमारे sports federations में ऐसी बातों का असर नहीं पड़ता?

#ऐसाक्यूँ

#ऐसाक्यूँ कि हमारे सभी राजनीतिक दल पुरुष प्रधान हैं? AAP भी आदमी ही चलाता है, औरतें नहीं दिखतीं?

#ऐसाक्यूँ कि हमारे Supreme Court में महिलाओं की संख्या नगण्य है?

#ऐसाक्यूँ की हमारे business leaders भी पुरुष ही दिखते हैं?

#मैंभी अब सिर्फ़ मात्र sexual harassment की आवाज़ ना रह जाए, इस लिए #MeToo अभियान इन संस्थानों, संगठनों और मुक़ामों के अंदर भी महिलाओं की पूरी भागीदारी की आवाज़ उठाए|

#मैंभी क़ाबिल हूँ, मेरी समाज के हर हिस्से में बराबरी की भागीदारी होनी चाहिए|

#MeToo सिर्फ़ Person of Year नहीं, आने वाले सभी वर्षों का नारा बने|

#मैंभी के इस अभियान में, मैं में पुरुष भी शामिल हैं, और हों|

#ऐसाक्यूँ कि #MeToo मात्र महिलाओं की आवाज़ ना रहे|

#मैंभी, मैं पुरुष और लड़के भी #MeToo को बुलंद करें|

२०१८, अगले वर्ष से #मैंभी इस बुलंदी से जुड़ा हूँ|

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राजेश टंडन

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