Author Archives: Samiksha Jha

बैनर-पोस्टर-नुक्कड़ पर पीरियड्स की चर्चा, पर घर की चारदीवारी में ‘पिन ड्राप साइलेंस’

“आजकल तो बच्चों को थोड़ा बहुत पता भी होता है कि माहवारी क्या है, हम जब छोटे थे तो हमें हमारी शादी के 2 साल बाद इसकी जानकारी हुई थी” ये बात दिल्ली में रहने वाली महिला घरेलू कामगर सरोज, … Continue reading

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मिसिंग केस ऑफ लोकल समिति- पार्ट 2

कार्यस्थल पर महिलाओं को यौन उत्पीड़न से सुरक्षा सुनिश्चित कराने वाले कानून को बने 9 वर्ष हो गए हैं। ये कानून 2013 में लागू हुआ था। इस कानून की एक मुख्य बात ये है कि ये हर कामकाजी महिला की … Continue reading

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कोरोना से नहीं, लॉकडाउन से डर लगता है

रात के बाद सवेरा ज़रूर होता है पर सवेरे के बाद रात भी ज़रूर आती है। 2021 में कोविड माहमारी ने एक बार फिर से लोगों को हद से ज़्यादा असहाय किया है, बुनियादी चीजों के लिए तड़पाया है। ये … Continue reading

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आशाओं का उत्सव- महिला दिवस

मैंने कई सालों से ये ग़ौर किया है कि महिला दिवस को छोड़कर अन्य विशेष दिनों जैसे कि ‘यूथ डे’ या ‘मेन्स डे’ का थीम हमेशा कुछ ऐसा होता है जिसमें बेहतर समाज की कल्पना की जाती है- यूथ या … Continue reading

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अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस 2021: आशाओं का उत्सव, कामकाजी महिलाओं के संग!

मैंने कई सालों से ये ग़ौर किया है कि महिला दिवस को छोड़कर अन्य विशेष दिनों जैसे कि ‘यूथ डे’ या ‘मेन्स डे’ का थीम हमेशा कुछ ऐसा होता है जिसमें बेहतर समाज की कल्पना की जाती है- यूथ या … Continue reading

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अपने ही समुदाय में बेधड़क घूमने से असुरक्षित महसूस करती हैं लड़कियां

“काश सुरक्षा भी किसी दुकान पे मिलती, उसको ख़रीद के रख लेती, ताकि सपनों को पूरा कर सकूँ” ये बात 14 वर्षीय नेहा ने कही है। आखिरी बार जब मैं नेहा से मिली थी तो उसने अपने ही घर के … Continue reading

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लॉकडाउन से जुड़े किशोर/किशोरियों के अनुभव

“रात हो गई है, और आकाश में तारे जगमगा रहे है, मोहल्ले में सब कोरोना की चर्चा कर रहे, शोर है, हल्ला है, शांति नहीं है, न घर के बाहर, न घर के भीतर” – आरती, 12 वर्ष लॉकडाउन महज … Continue reading

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“कदम बढ़ाते चलो”: कैसे 7 साल पहले डा. मार्था फैरेल के नेतृत्व में इसकी शुरुआत हुईं?

मार्था फैरेल फाउंडेशन के 5 साल पूरे होने के साथ साथ, मार्था द्वारा लैंगिक समानता के लिए देखे गए सपने ने थोड़ी और उड़ान भरी । हम जब भी मार्था को याद करते है तो उनकी लैंगिक समानता और हिंसा … Continue reading

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नए कल की शुरुआत आज से ही होगी

  “हम अभी क्या है? और आगे क्या हो सकते है, हम अभी क्या सोचते हैं, हम किस तरह की बातों का समर्थन करते हैं, ये सब कुछ हमारी socialization और past experiences पर निर्भर करता है” | ये बात … Continue reading

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आवाज़ ऊठी नहीं तो, जुल्म और बढ़ता जायेगा

“आवाज़ ऊठी नहीं तो, जुल्म और बढ़ता जायेगा”, ये अपने आप में एक ऐसा वाक्य है जो सदियों से हो रहे भेदभाव, हिंसा और गैर बराबरी की गवाही दे रहा है। 4 अप्रैल को ” वीमेन मार्च फ़ॉर चेंज” का … Continue reading

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