“कदम बढ़ाते चलो”: कैसे 7 साल पहले डा. मार्था फैरेल के नेतृत्व में इसकी शुरुआत हुईं?

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मार्था फैरेल फाउंडेशन के 5 साल पूरे होने के साथ साथ, मार्था द्वारा लैंगिक समानता के लिए देखे गए सपने ने थोड़ी और उड़ान भरी । हम जब भी मार्था को याद करते है तो उनकी लैंगिक समानता और हिंसा को रोकने को लेकर चलाई गई मुहिम को ज़रूर याद करते हैं।

2012 में हिंसा की ऐसी वारदात हुई, जिसने हर किसी को झंजोर कर रख दिया, पर उस घटना के बाद युवाओं ने जो प्रदशर्न किया उससे ये साफ दिखा कि देश के युवाओं में ग़लत के खिलाफ आवाज़ उठाने के लिए बेहद क्षमता हैं।

इसी बात को आगे बढ़ाते हुए मार्था ने 2013 में “कदम बढ़ाओ” कैंपेन की शुरुआत हरियाणा के सोनिपत जिले से की। इसकी शुरुआत करने से पहले विभिन्न संस्थाओं और युवाओं के साथ बैठक की गई, जिसमें मुख्यतः ये पता लगा कि लोगों के पास मुद्दे तो है पर उनको अपने मुद्दों को रखने के लिए कोई प्लेटफार्म नहीं हैं और वे अपने ही मुद्दों की आवाज़ नहीं बन पा रहे थे।


इस कैंपेन में बड़ी संख्या में किशोर जुड़े जिन्होंने लैंगिक समानता को लाने के लिए और हिंसा को ख़त्म करने के लिए मुहिम को आगे बढ़ाया। इस कैंपेन की सफलता के बाद , इसको एक प्रोग्राम के तरह 2015 में लॉन्च किया गया। कैंपेन को प्रोग्राम बनाने के पीछे की वजह मार्था के विचारों को ज़िंदा रखना भी था इसलिए “कदम बढ़ाते चलो” के नाम से प्रोग्राम की शुरुआत हुईं। ये किशोरों और युवाओं के नेतृत्व से चल रहा एक प्रोग्राम है जिसमे महिलाओं और लड़कियों के साथ होने वाले हिंसा को रोका जाता हैं।

“कदम बढ़ाते चलो” प्रोग्राम के मूल सिद्धांत हैं:

  • अपनी आवाज़ को खोजना
  • जो हो रहा है या जो नहीं हो रहा है उसपर सवाल उठाना
  • सहभागिता के साथ बदलाव की ओर बढ़ना

पिछले 5 वर्षों में इस प्रोग्राम के ज़रिए 30 लाख लोगों तक पहुंचा गया है (प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से)। देश के लगभग 15 राज्यों और 22 लोकेशन में “कदम बढ़ाते चलो” प्रोग्राम चल रहा हैं। किशोर लड़के और लड़कियां स्कूल, समुदाय, पंचायत और स्थानीय संस्थाओं के साथ भागीदारी में काम कर रहे हैं ।

हिंसा एक परिणाम है पर उसके साथ उसके होने के कई वजहें भी जुड़े हुए हैं, जिसमें से एक वजह लैंगिक भेदभाव/असमानता हैं। “कदम बढ़ाते चलो” प्रोग्राम के तहत हर पह्लुयों पर चर्चा की जाती है ताकि कोई भी मुद्दा अछूता न रहे, चाहे वो किशोरावस्था में हो रहे बदलाव हो,खेलकुद हो, यौन स्वास्थ्य हो या कानून के बारे में हो।

अगर हम “कदम बढ़ाते चलो” प्रोग्राम का एक सारांश देखें तो वो इस चित्र की मदद से समझा जा सकता हैं, जिसमें कैसे संवेदनशीलता और चेतना के साथ उठाए गए कदम जिम्मेदारी, जागरूकता और सुरक्षा की ओर ले कर जाते हैं।

The journey of KBC’s many programs. Image courtesy of the author.

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