मार्था मैडम हमारे नज़र में

Author: Dhan Singh


मार्था मैड़म को अगर हम अपने शब्दों में परिभाषित करें तो वो एक ऐसी व्यक्त्वि की धनी महिला थीं जिनकी मौजूदगी का अपना अलग ही महत्व होता था और जहाॅ तक हम अपने व्यक्तिगत बात करें तो वो हमारे लिए एक अभिभावक, शिक्षिका, और मार्गदर्शक से कम नही थीं उनके मार्गदर्शन ने हमें बहुत कुछ सीखाया। वो मार्था मैडम ही थीं जिन्होंने मुझे अपनी पढ़ाई आगे जारी रखने के लिए प्रेरित किया जब मैंने बी ए, पहला साल पास किया तो उन्होंने खुद सारे स्टाफ के लिए मिठाई मंगाई, ये अपनापन हम कभी भूल नहीं सकते जब भी वो हमारे लिए कुछ करती या बोलती थीं वो हमारे लिए बहुत खास होता था। जब भी हमें या किसी को कोई व्यक्तिगत जीवन में या आफिस में कोई समस्या होती थी तो सबको पता होता था कि हम मार्था मैडम के पास जाएंगे तो कोई ना कोई हल जरूर निकाल लेंगी। इसीलिए उनको हम एक अभिभावक के रूप में भी देखते थे। उन्होंने ही हमें सिखाया कि ऑफिस में हाउसकींपग को सुपरवाइज़ करते समय हमें किन किन बातों का ध्यान रखना चाहिए हमारे ऑफिस की साफ सफाई के मानक उन्होंने ही तय किए और उसके लिए हमें प्रशिक्षित भी किया जिसके अनुरूप हम आज भी उसी का पालन करने की कोशिश करते हैं । मार्था जी हमेशा कहती थीं कि चीजों को कुछ अलग नज़रिए से देखने और करने की कोशिश करो। कभी हमसे कोई गलती होती भी थी तो डांटने के साथ - साथ समझाती भी थी हमें क्या करना चाहिए था उनका डाटना हमारे लिए वैसे ही होता था जैसे किसी घर का अभिभावक अपने बच्चों को डांटता है हमें पता होता था कि उनका डांटना हमारे भले के लिए ही है। मार्था जी भले ही आज शारीरिक रूप से हमारे बीच मौजूद नहीं हैं किन्तु उनकी सिखाई सीख और उनकी सोच हमेशा हमारे साथ रहेगी।


मार्था मैडम के प्रति दिल से आभार!
धन सिंह